आज कई दिनों बाद दिल ने कहा हिंदी में कुछ लिखो| ज़िन्दगी बारे में लिखो| उस
सफ़र के बारे में लिखो जिसपे हम सब ही चले जा रहे हैं|
ज़िन्दगी क्या हैं? कौनसा शक्स जिंदा हैं? मेरे नज़रिये में जिंदा वही हैं
जिसे दिल से मुसकुराना याद हैं| जिंदा वही हैं जो एक नन्हे से बच्चे की
किलकारी पे खुश हो सकता हैं| जिंदा वही हैं जो बारिष में रुके हुए गाड़ियों की
कतार को नहीं देखता बल्की फूलों और पत्तों पे बिछी ओस जैसे बूंदों को देख
सकता हैं| जिंदा वो नहीं जो इसलिए रोये की किसी ने उसकी कदर नहीं की| जिंदा वो
हैं जो इसलिए खुश हैं की उसे अपनी कदर हैं| तुम्हे कौन प्यार करता हैं
तुम्हे कौन चाहता हैं ये ज़रूरी हैं| पर इससे बढ़कर ये ज़रूरी हैं की जिसने
तुम्हे प्यार किया, जिसने तुम्हारी कदर की, जिसने तुम्हे इज्ज़त दी, तुमने
उसके साथ क्या किया|
मैं रोज़ train में सफ़र करती हूँ| कई लोगों की बातें सुनती हूँ| कई सारे
एहसास महसूस होते हैं लोगों के पास से| कुछ लोगों की तो शकल देख के लगता हैं –
इसके चेहरे पे 12 क्यों बजे हैं!!! हाँ – हो सकता हैं की ज़िन्दगी में
मुश्किल हो| रोज़ रोज़ तुम्हारे सामने नये पहाड़ खड़े हो| पर ज़िन्दगी की ही
तरह दुनिया में भी पहाड़ तो होते हैं| कई लोग शौक से उन पहाड़ों की चढ़ाई करते
हैं| क्योंकि चाहे उस सफ़र में जितनी तकलीफ हो, उस चढाई के आगे का जो नज़ारा
हैं उस पहाड़ की ऊंचाई पे जो ताज़गी हैं वो नीचे ज़मीन पे नहीं मिलेगी| पर
दुनिया के पहाड़ों को चढ़ के उतरना ही पढता हैं, ज़िन्दगी में जो एक बार तुमने
पहाड़ पार कर लिया जो ऊंचाई पा ली, वहां से तुम्हे उतारना बस भगवान के हाथ में
हैं|
तुमसे जो प्यार करते हैं तुम उनसे प्यार करो| तुम्हे जो चाहते हैं, उनकी
इज्ज़त करो| तुम जिन्हे चाहते हो, उस कतार में सबसे आगे अपने आप को रखो|
क्योंकि फिर चाहे वो कोई भी क्यों ना हो, ज़िन्दगी के पहेले नज़ारे से ज़िन्दगी
के आखरी पल तक, तुम्हारा साथ सबसे पहेले तुम ही देते हो| अगर अपने आप के साथ
नहीं जी सकते तो उस ज़िन्दगी के कोई मायने नहीं रह जाते| सुनो सब की, करो
वही जो तुम्हारे दिल की हो| क्योंकि कल पलट के तुम अपनी ज़िन्दगी को देखो तो
तुम्हारी हार में भी तुम्हारे मेहनत और तुम्हारे इमानदारी के वो यादें तुम्हे
ख़ुशी ही देंगे.
कई ऐसी चीज़ें हैं कई ऐसे मंज़र हैं जो मैं चाहती थी पर हासिल नहीं कर पाई| पर
मेरी हर कोशिश में एक इमानदारी थी एक सच्चाई थी| मैंने जो चाह वो हमेशा दिल से
चाहा| मिलना न मिलना वो मेरे भगवान के हाथ में था| और जिस चीज़ को भगवन ने
मुझे नहीं दिया, उसमें ज़रूर कोई न कोई कमी रही ही होगी, ये मेरा विश्वास हैं|
आज मैं जहाँ हो वहां पे भी कुछ कमिया तो हैं| पर सारे रंग अगर एक ही साथ मिल
जाए तो कोरी सफेदी ही बनाते हैं| मैं क्यों उन कमियों को देख कर
दुखी होना चाहूंगी जब मेरे पास खुश होने के लिए भी इतना सारा हैं? जिस उंचाई
पे मैं आज खड़ी हूँ वहां का नज़ारा ही बहुत अच्छा हैं| लेकिन जो सामने इससे भी
ऊंचा पहाड़ हैं उसका नज़ारा और कितना हसीन होगा| यहाँ बैठी मैं - या तो यही खुश
हो सकती हूँ की येही बहुत हैं, या चलके वहाँ देख सकती हूँ| दोनों ही मेरे हाथ
में हैं| अगर मैं रुकी - तो ये सोचना बेकार हैं की मैंने पता नहीं क्या खो
दिया| क्योंकि वो मेरा फैसला था| अगर मैं निकल पड़ी, तब भी ये मेरा ही फैसला
होगा| निकलने की उस घडी ही में सफ़र में आने वाली हर मुश्किल के बारे में
शिकायत करने का हक खो देती हूँ|
कल क्या होगा पता नहीं| कल जो हुआ था अब मैं उसका कुछ नहीं कर सकती| ज़िन्दगी
में ये जो आज हैं वही आगे जाके मेरी यादें बनेंगी| मेरी ज़िन्दगी इस आज को
खूबसूरत बनाने की कोशिश हैं! यही हैं मेरी ज़िन्दगी और इसी लिए मैं खुश हूँ|
और चुकीं मैं खुश हूँ मैं जिंदा हूँ|
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